दिल्ली से श्याम मार्ग पकड़िए और खाटू की ओर चलिए। यह चैनल हारे के सहारे के भजन बिना रुके बजाता है — वही भजन जो निशान लेकर चलने वालों के साथ चलते हैं।
यह चैनल सुनिएमुफ़्त • बिना विज्ञापन • 24 घंटेदिल्ली से खाटू श्याम लगभग 265 किलोमीटर है और NH 48 से करीब पाँच घंटे लगते हैं। रास्ता गुरुग्राम और बहरोड़ होते हुए राजस्थान के सीकर ज़िले में उतरता है, और रींगस से खाटू बस थोड़ी दूर रह जाता है।
फाल्गुन के मेले में यह आख़िरी हिस्सा पैदल तय किया जाता है। रींगस से खाटू तक की सड़क तब निशान लिए चलने वालों से भर जाती है, और पूरे रास्ते भजन बजते रहते हैं।
खाटू के श्याम बाबा को बर्बरीक माना जाता है — घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र। कथा है कि महाभारत के युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने उनसे शीश का दान माँगा और बर्बरीक ने बिना हिचक दे दिया। कृष्ण ने प्रसन्न होकर उन्हें अपना ही नाम — श्याम — दिया और वरदान दिया कि कलियुग में वे इसी नाम से पूजे जाएँगे।
इसीलिए उन्हें हारे का सहारा कहा जाता है, और तीन बाण धारी भी। मंदिर सीकर ज़िले के खाटू गाँव में है। फाल्गुन शुक्ल एकादशी के आसपास लगने वाला लक्खी मेला यहाँ का सबसे बड़ा आयोजन है, जिसमें लाखों लोग निशान लेकर पहुँचते हैं।
हारे का सहारा भाव में श्याम बाबा के भजन और आरती चलती है — वही रचनाएँ जो खाटू के दरबार में और निशान यात्रा में सुनाई देती हैं। दूसरा भाव सम्पूर्ण भक्ति है, जिसमें पूरे संग्रह से भजन आते हैं।
चैनल हर बार अलग क्रम में शुरू होता है, इसलिए बार-बार खोलने पर भी वही शुरुआत नहीं मिलती।
मान्यता है कि जो हर जगह से हार जाए, श्याम बाबा उसका साथ देते हैं। बर्बरीक ने अपना शीश दान कर दिया था, और उसी त्याग के कारण उन्हें हारने वालों का सहारा माना गया।
हाँ, श्याम आरती इस चैनल के संग्रह में है और क्रम में अपने आप आती है।
पूरी तरह मुफ़्त। न शुल्क, न लॉगिन, न कोई सदस्यता।
बहुत छोटे वीडियो अपने आप छोड़ दिए जाते हैं ताकि हर कुछ सेकंड में गाना न बदले। कभी-कभी कोई भजन उपलब्ध न होने पर भी अगला चला दिया जाता है।