हरिद्वार से केदारनाथ तक की कांवड़ राह पर चलिए और बिना रुके शिव भजन सुनिए। न बीच में विज्ञापन, न प्लेलिस्ट बनाने की झंझट — चैनल चुनिए और भोलेनाथ के नाम में डूब जाइए।
यह चैनल सुनिएमुफ़्त • बिना विज्ञापन • 24 घंटेहरिद्वार से केदारनाथ लगभग 250 किलोमीटर है और पहाड़ी रास्ते में इसमें करीब नौ घंटे लगते हैं। सड़क हरिद्वार से ऋषिकेश, फिर देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गुप्तकाशी और सोनप्रयाग होते हुए गौरीकुंड तक जाती है। गौरीकुंड से आगे का रास्ता पैदल है — मंदाकिनी की घाटी के साथ-साथ चढ़ाई।
यही वह मार्ग है जिस पर सावन में लाखों कांवड़िए गंगाजल लेकर चलते हैं, इसलिए इस चैनल का नाम कांवड़ मार्ग है। रेडियो पर यात्रा की बची हुई दूरी घटती दिखती रहती है, जैसे आप सचमुच रास्ते में हों।
केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और उन सबमें सबसे ऊँचाई पर स्थित है — समुद्र तल से लगभग 3,583 मीटर, गढ़वाल हिमालय की गोद में। मंदिर के पीछे केदारनाथ शिखर खड़ा है और नीचे मंदाकिनी बहती है।
परंपरा कहती है कि पांडवों ने महाभारत युद्ध के बाद प्रायश्चित के लिए यहाँ शिव को खोजा था, और बाद में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का पुनरुद्धार किया। भारी बर्फ़ के कारण मंदिर साल भर खुला नहीं रहता — कपाट अक्षय तृतीया के आसपास खुलते हैं और भाई दूज के आसपास बंद हो जाते हैं। सर्दियों में भगवान की पूजा ऊखीमठ में होती है।
दो भाव हैं। भोले का दीवाना में शिव भजनों का पूरा संग्रह चलता है — शांत, भक्ति से भरे भजन जो लंबी यात्रा के साथ चलते रहें। महाकाल तांडव में वे रचनाएँ हैं जो रौद्र रूप की हैं, जैसे शिव तांडव स्तोत्र और उस तरह के तेज़ स्तोत्र।
हर बार चैनल चुनने पर क्रम बदल जाता है, इसलिए वही भजन उसी क्रम में दोबारा नहीं सुनाई देते। सभी भजन Best Bhakti Music चैनल से आते हैं।
हाँ। न कोई शुल्क, न लॉगिन, न सदस्यता। भजन सीधे YouTube से स्ट्रीम होते हैं, इसलिए कलाकार और चैनल दोनों को उसका श्रेय मिलता रहता है।
यह रेडियो है, प्लेलिस्ट नहीं — भजन अपने आप बदलते रहते हैं। पर अगले और पिछले के बटन हैं, और जो भजन पसंद आए उसे दिल के निशान से मेरी माला में सहेजा जा सकता है।
हाँ। ऑडियो कम बिटरेट पर स्ट्रीम होता है और पेज पर कोई भारी तस्वीर नहीं है, इसलिए 3G या कमज़ोर सिग्नल पर भी यह चलता रहता है।
सोमवार शिव का दिन माना जाता है, और सावन का पूरा महीना। पर रेडियो चौबीसों घंटे चलता है — जब मन करे, खोल लीजिए।